अच्छा सुनों

Posted on: 19.april.2017

Monakhaan.com

Twitter: @Mona_khaan

अच्छा सुनो ना !!!

न जाने कैसा रिश्ता है अपना ना कभी मिले ना कभी देखा फिर भी एक दुजे पर इतना यकिन एक दुजे की इतनी फिक्र रहती है?

किस्मत की दुरियां है  मेरे और तुम्हारे दरमियान… लेकिन फिर भी सब कुछ कितना सुकुन भरा है

और जिन लम्हों में तुमसे बात हो जाती है चैहरे पर स्माईल आ जाती है और उसे स्माईल से जो दिल खुश होता है उसकी बात ही कुछ और है…!!

अपना इंतज़ार बहुत लम्बा है ..मुझे उमीद है एक दिन हम जरुर मिलेगे  तुमसे मिलने की तमन्ना रहती है . एक अधूरी आस..रहती है एक बैचन प्यास रहती है….!!

मैंने हर जगह देखा तुम्हे…सपनों में ,भीड़ में,अकेले में,मौन में,कौलाहल में..और भी पता नहीं कहाँ कहाँ..तुम ही तो हो 

..!!पता नहीं किस जन्म का नाता है तुमसे..
तुम मिले…और एक नई जिंदगी नई ख्वाहिशें शुरू हुई….मेरी,हाँ ! मेरी अधुरे मन की पुरी बात हुवी..!!

मुझे लिखना अच्छा लगता है…और ख़ास कर तुम्हे लिखना..और जब मैं तुम्हे लिखती हूँ तो बस सिर्फ तुम ही तो होते हो .मेरी मोहब्बत मेरी इश्क तो बस तुझे यही जिंदगी भर लिखना चाहें
सच कहूँ तो मुझे तुमसे तब प्रेम नहीं हुआ,जब मैंने तुम्हे देखा था..पर हाँ,मुझे प्रेम हुआ तुमसे जब मैंने तुम्हे समझा है ..और उसके बाद तो हर  रोज ही मुझे तुमसे प्रेम हुआ.

अच्छा,एक बात बताओ..क्या तुमे भी यकिन है हम एक दिन जरुर मिलेगे हमारी अधुरी मोहब्बत अधुरी ख्वाहिशें कभी ना कभी पुरी होगी??

बस तुझे लिखु तो लिखती ही जाउ कभी खत्म ही नही होते मेरे लफ्ज….. 

हो सके तो कभी मेरी खामोशी को भी सुन लेना !!!

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Author: MonaKhaan_

I keep my ideals, because in spite of everything I still believe that people are really good at heart.