तेरी गलियों में

तेरी गलियों में
​हमने जो मोहब्बत के चिराग जलाए हैं तेरी गलियों में….. फिर से अपने कुछ अधूरे ख्वाब सजाए है तेरी गलियों में.
जाने यह इश्क है या है करामात अपनी…के तेरी यादो की बारात ले आए है तेरी  गलियों में
सुकुन जो मिलता नही कही और तो लौट आए फिर से हम तेरी गलियों में…
अब जो सोचते हैं तेरी गलियों का तो खामोश हो जाते हैं दिल ने वह जख्म उठाए हैं तेरी गलियों में
इसलिए भी तेरी गलियों से दूर रहते हैं अब  हम क्योंकि अरमान अधुरे जो रह गए थे तेरी गलियों में 
क्यों हर एक चीज अधूरी सी लगती है जाने क्या छोड़ आए हैं तेरी गलियों में हम
Written by mona
Posted on 15.april.2017
Twitter: @Monakhaan_

Website monakhaan.com

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Author: MonaKhaan

Am writer blogger poetess' photographer singer youtuber... Trend supporter... I keep my ideals, because in spite of everything I still believe that people are really good at heart.